12 Comments

  1. बिल्कुल सही कहा..
    थोड़ी इंसानियत कमानी है क्योंकि पैसा कमाते कमाते हम लोग मानवता ही भूल गये हैं

  2. “मान-रुतबा यहीं रहेगा सब,साथ सद्कर्म को ही जाना है।”
    लालची लोगों को आइना दिखाती हुई कवि की बहुत ही प्रेरक रचना
    साधुवाद

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