झूठे थे वादे सभी
झूठे तेरे इरादे भी
लफ्ज़ भी शर्मिंदा है
तुझे बयाँ कैसे करें
कुत्सित तेरी सोच थी
कुटिल थी फितरत तेरी
लफ्ज़ भी शर्मिंदा है
तुझे बयाँ कैसे करें
©अनीता शर्मा
अभिव्यक्ति बस दिल से
दगाबाज़
Comments
7 responses to “दगाबाज़”
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सुन्दर अभिव्यक्ति
कलापक्ष मजबूत-
Shukriya sir
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वेलकम
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👌👌👌
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Shukriya pragya ji
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बेहतरीन
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Wah
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