दरीचों से झाकती ये ज़िंदगी

दरीचों से झाकती ये ज़िंदगी
सड़को पर भागती ये ज़िंदगी
हर तरफ फैली है चिंगारियां, ,
लम्बे क़दमों से लांघती ये ज़िंदगी

राजेश ‘अरमान’

Comments

2 responses to “दरीचों से झाकती ये ज़िंदगी”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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