दर्द

तेरी यादों का समन्दर कभी सुखता नही।
आँखों में खुशी है मगर दर्द मिटता नही।

चौमासें सावन सा बरसता गम है सीने में,
जुदा-ए-सनम तुम बीन दिल अब लगता नही।

लाख बोई फस्लें आरजुओं की दिल-ए-जमां पे,
पर विरान -ए-दिल मे बहारें खुशीयॉ पलता नही।

जिन्दगी के हर पहलू से गुजर देखा मैनें,
जो प्यार तुमने दिया वो, कही अब मिलता नही।

कहां ढुढूं तुमसा और प्यार तेरा सा…….,
तू तो लाखो में थी तुमसा कही अब मिलता नही।

माना यह पहली मोहब्बत का दर्द है ” योग्न्द्र”
लाख मिटाओं पर दर्द अब मिटता नही।

Comments

3 responses to “दर्द”

  1. Abhishek kumar

    Nice

  2. Abhishek kumar

    Wow

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