दाद

दाद देता हूं आपके परख को,
सलाम करता हूं आपके समझ को।
आप समझ लेती है इशारों इशारों की बातें,
बड़ी शातिर है परखने में लोगों को,

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

3 responses to “दाद”

  1. ?? ये कविता तो नहीं है

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