दिल का तड़पना

प्रेम में दिल का तड़पना होता है,
अपने प्रीति को पाने का चाह होता है।
दर्द लोक लाज सब बिसरा कर,
प्रेमी खुद को पागल आवारा समझता है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

5 responses to “दिल का तड़पना”

  1. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

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