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  1. स्वप्न पलकों पर सुहाने सजते रहे,
    दीप मोहब्बत के जलते रहे।
    धड़कन भी गीत गुनगुनाने लगी,
    सांसे भी कविता सुनाने लगीं।
    ——- कवि गीता जी की बहुत लाजवाब रचना है यह। बहुत खूब

  2. धानी चुनर हवा में लहराने लगी,
    पवन में तेरी ख़ुशबू मुझे आने लगी।
    –––// कवि गीता जी की बेहतरीन रचना, भाषा व भाव दोनों ही अति सुंदर

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