दीप

दीप जलता रहा,
जब बहुत देर तलक
लौ भी टिमटिमाने लगी,
लो तेल भी हुआ ख़त्म
और उसकी जान भी,
डगमगाने लगी….

*****✍️गीता

Comments

5 responses to “दीप”

  1. सुंदर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. दीप जलता रहा,
    जब बहुत देर तलक
    लौ भी टिमटिमाने लगी,
    लो तेल भी हुआ ख़त्म
    और उसकी जान भी,
    डगमगाने लगी….
    बहुत ही जबरदस्त वाह, गागर में सागर भरा है।

  3. Geeta kumari

    इस उच्च कोटि की समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

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