5 Comments

  1. दीप जलता रहा,
    जब बहुत देर तलक
    लौ भी टिमटिमाने लगी,
    लो तेल भी हुआ ख़त्म
    और उसकी जान भी,
    डगमगाने लगी….
    बहुत ही जबरदस्त वाह, गागर में सागर भरा है।

  2. इस उच्च कोटि की समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी बहुत बहुत शुक्रिया 🙏

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