दुआए

कुछ नहीं कर सकते हो तो दुआए करो
शायद कबूल हो जाए
महामारी का शूल चुभा है जो
शायद गुलाब का फूल हो जाए

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2 responses to “दुआए”

  1. समसामयिक रचना

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