दुनिया हैं जनाब

रंग-बिरंगे नज़ारे हैं बेहिसाब..
खो न जाना इन नज़ारो में.. ज़रा सम्भलना,
यह दुनिया हैं जनाब।

साथ बैठ के खाते जिस संग,
वहीं दगा कर जाते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करते बेहिसाब,
ज़रा सम्भल कर यह दुनिया हैं जनाब।

नकाबी चहरे को देख कर दिल की बातें है बताइ जाती
सच्चे हीरें को फेका जाता.. ‘कह कर यह हैं खराब..
ज़रा सम्भल कर.. यह दुनिया हैं जनाब

Comments

15 responses to “दुनिया हैं जनाब”

  1. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    बहुत खूबसूरत

  2. Finding (Hemlata Soni)

    Thanq

    1. Finding (Hemlata Soni)

      Thanq

  3. Alok Kumar Avatar

    बहुत खूब

  4. Finding (Hemlata Soni)

    Thank you

  5. Satish Pandey

    अच्छी पंक्तियाँ

  6. सही कहा है आपने पंक्तियां सुंदर हैं

Leave a Reply

New Report

Close