दुल्हन की डोली

सहम गया है चाँद भी देखो, जब उतरी की डोली रे

मन को भायी जैसे बजायी कहीं मोहन ने मुरली रे

बहके हैं देखो सब जैसे , पूरी मधुशाला पी ली रे

कैसे संभालेगा खुद को वो,जिसकी अब तू हो ली रे

Comments

2 responses to “दुल्हन की डोली”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Nice

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