दूसरों पर निशाना

दूसरों पर निशाना साध कर,
तुम सुखी नहीं रह सकते,
जब खुद जहर बाँटोगे तो,
दूसरे से अमृत की,
आशा नहीं कर सकते।
न तुम्हारा राज था,
न तुम्हारा राज रहेगा,
खुद को शेर समझने वाले को,
सवा शेर मिला ही है,
मिलता ही रहेगा।
प्रेम पाने के लिए,
थोड़ा प्रेम देना पड़ता है,
झुकना पड़ता है,
अकड़ कर चलने वालों को
तो
केवल टेंशन में रहना पड़ता है।

Comments

4 responses to “दूसरों पर निशाना”

  1. अतिसुंदर रचना 

  2. बहुत खूब

  3. Amita

    प्रेम पाने के लिए थोड़ा प्रेम देना पड़ता है,झुकना पड़ता है,
    सुंदर अभिव्यक्ति

  4. उत्तम सृजन

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