12 Comments

  1. लेखनी पर आपकी बेहतरीन पकड़ है संदीप जी, सुस्पष्ट शैली , प्रखर विचार, यथोचित निखार है। कथ्य व शिल्प का बेहतरीन तालमेल है। गद्यात्मक शैली में पद्यात्मकता है, बहुत खूब। keep it up, very nice

  2. वाह
    बहुत सुंदर
    समाज और राजनीति को आईना दिखाते हुए साफ और सुन्दर प्रस्तुति। इसे व्यंग्य कहना उचित नहीं होगा क्योंकि ये तो यथार्थ चित्रण है। आपकी लेखनी का क्या कहना…..!!!!!!! अतिसुंदर 🌹

    1. अरे ! सर, मैं केवल कविता का विद्यार्थी हूँ, मुझे प्रोत्साहन देन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद पंडित जी आपका

    1. लंगड़ाय सिस्टम को केवल साहित्य ही सहारा दे सकता है, समीक्षा के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

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