देश समाज

देश समाज में ये क्या फैला है,
आतंक का बजता बिगुल यहां हैं।
देख कर अहर्निश का अपराध,
रो रो कर मेरा बुरा हाल हुआ है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

6 responses to “देश समाज”

  1. Satish Pandey

    waah, waah

  2. Anita Sharma

    Waah👍

  3. रो-रोकर
    यहाँ

  4. कभी अपने मन की वेदना को प्रकट कर रहा है

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