दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए।
कद्र हमसे ना हुई,जो जुदा इस तरह हुए।
हमने भी तो कुछ ,ज्यादा नहीं माँगा था आपसे।
इतना सा त्याग कर सके ना आप हमारे वास्ते।
महफिल म़े कद्र हुई ना हमारे ज्जबात की।
आँखों में आँसू जम गये जब बिछुडने की बात की।
दिल में हुआ अँधेरा ,ना कोई रोशन चिराग था,
तुम अपनी रहा चल दिये, हम राह देखते रहे।
जब हँस रहे थे चाँद तारे खुले आकाश म़े,
तब रो रही थी आँखे हमारी तुम्हारी याद में।
हम समझा रहे थे दिल को दे रहे थे तस्सली।
आँखे निगैढी बार बार कर रही थी चुगली.
हिया हूलक रहा था मेरा सोच कर ये बार बार,
अब ना खुलेंगे कभी ,दिल के किसी के द्वार।
आएँगी अब ना लौट कर अधरों पर हँसी कभी।
ले गये समेट तुम जीवन की हर खुशी।
दुश्मन को भी कभी ना रब ऐसी मुश्किल में डालना।
खुशियों के मेले से उठा,गमें दरिया म़े ना डालना।
दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए
Comments
3 responses to “दोस्ती आपकी इक तौफा थी हमारे लिए”
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nice one
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bahut acha kavya srajan
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शुक्रिया
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