दोहे =भाई चारा

ईर्ष्या करके मत जलो, तज दीजय अभिमान
क्रोध लोभ से दूर मैं, हो जाऊं भगवान्
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भाईचारा खेत में, चलिए मन हे आज
सुख पाओगे बहुत तुम, और करोगे नाज

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2 responses to “दोहे =भाई चारा”

  1. विचारणीय है 

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