दो तरह के लोग..

” गीता” इस संसार में, दो तरह के लोग,
परवाह नहीं इस भयंकर रोग की, भागे फिरते रोज़ ।
दूजे वाले डरकर रहते, घर से बाहर कम निकलते,
मगर मज़े की बात देखो, …….
दोनों ही एक – दूजे को बेवकूफ़ हैं समझते
……….✍️ गीता..

Comments

20 responses to “दो तरह के लोग..”

  1. Pratima chaudhary

    सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

  2. मैं दूसरे प्रकार वाली हूँ
    मुहल्ले वाले चेहरा भी भूल जाते हैं मेरा

  3. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Atisunder

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया भाई जी🙏

  4. अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Isha ji 💐

  5. Satish Pandey

    गीता जी, नाम ही गीता है ज्ञान का भंडार है। पारखी नजर जीवन के बारीक पहलू पर जा पहुंची है। आपकी लेखनी ने सत्य को उजागर किया है। यह आपकी कवित्व क्षमता का परिचायक है। keep it up

  6. Geeta kumari

    अरे ,सतीश जी इतना सारा सम्मान।🙏🙏
    बस यूं ही रोज़ सोचती थी कि लोग थोड़ा सा और पालन करते लॉक डाउन का तो कदाचित ये कोरोना इतना ना फैलता।ये मेरा व्यक्तिगत विचार है। बस उसी सोच के कारण ये पंक्तियां लिख दीं।
    ……. आपकी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  7. आपकी कविता बेहतरीन है

  8. Suman Kumari

    बहुत ही अच्छी रचना, हमारी लापरवाही को बताती
    अस्तित्व बनाये रखने को थोड़ा- सा धैर्य रखने का पाठ सिखाती

    1. Geeta kumari

      कविता के भाव समझने के लिए आपका धन्यवाद सुमन जी 🙏

  9. Suman Kumari

    इस मुद्दे को उठाने के लिए बधाई के पात्र हैं मानुषजी।
    एक बात मै यह जोङना चाहुगी कि टिप्पणी से पहले कविता की गुणवत्ता को भी देखा जाए।
    निष्पक्षता से मूल्यांकन किया जाये, ताकि आस्था बनी रहे ।
    सादर धन्यवाद ।

    1. Geeta kumari

      सुमन जी ये वाला मैसेज आपको मोहन जी को रिप्लाई करना था।शायद गलती से मुझे हो गया है।कृपया इसे यहां से डिलीट कर दें।और मोहन जी को ही भेजें।धन्यवाद।

  10. Devi Kamla

    बहुत सुन्दर लेखनी

    1. Geeta kumari

      समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद मैम , हार्दिक आभार 🙏

  11. Indu Pandey

    bahut hi sundar

    1. Geeta kumari

      Thanks for your lovely complement Indu ji 🙏

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