20 Comments

  1. गीता जी, नाम ही गीता है ज्ञान का भंडार है। पारखी नजर जीवन के बारीक पहलू पर जा पहुंची है। आपकी लेखनी ने सत्य को उजागर किया है। यह आपकी कवित्व क्षमता का परिचायक है। keep it up

  2. अरे ,सतीश जी इतना सारा सम्मान।🙏🙏
    बस यूं ही रोज़ सोचती थी कि लोग थोड़ा सा और पालन करते लॉक डाउन का तो कदाचित ये कोरोना इतना ना फैलता।ये मेरा व्यक्तिगत विचार है। बस उसी सोच के कारण ये पंक्तियां लिख दीं।
    ……. आपकी सुंदर समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  3. बहुत ही अच्छी रचना, हमारी लापरवाही को बताती
    अस्तित्व बनाये रखने को थोड़ा- सा धैर्य रखने का पाठ सिखाती

  4. इस मुद्दे को उठाने के लिए बधाई के पात्र हैं मानुषजी।
    एक बात मै यह जोङना चाहुगी कि टिप्पणी से पहले कविता की गुणवत्ता को भी देखा जाए।
    निष्पक्षता से मूल्यांकन किया जाये, ताकि आस्था बनी रहे ।
    सादर धन्यवाद ।

    1. सुमन जी ये वाला मैसेज आपको मोहन जी को रिप्लाई करना था।शायद गलती से मुझे हो गया है।कृपया इसे यहां से डिलीट कर दें।और मोहन जी को ही भेजें।धन्यवाद।

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