दो शेर

नजर मिला के मेरे हमराज़ वहाँ छोड़ा ।
देखने आते हैं दो गुलाब जहाँ तालकटोरा।।
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इश्क़ -ए-राहत के दवा लाया जब इन्दौर से।
उतरने लगा तब इश्क़ -ए- जुनून मेरे सिर से।।

Comments

3 responses to “दो शेर”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice

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