धरा माँ है हमारी
पालती है पोसती है,
इसी में जिंदगी
सारे सुखों को भोगती है।
अन्न रस पहली जरूरत
है हमारी जिंदगी की,
वायु-जल के बिन कहाँ है
कल्पना इस जिन्दगी की।
और सबसे मूल है
टिकना हमारा पृथ्वी पर
आश्रय लेना चलाना
जिन्दगी को पृथ्वी पर।
एक आकर्षक गुरुत्वी
खींचता है केंद्र को जो
इस तरह से है कि जैसे
माँ लगाती वक्ष से हो।
चारों तरफ है वायुमंडल
जिंदगी को सांस देता,
नीर है अन्तःपटल में
जिन्दगी की प्यास धोता।
भानु की किरणों से लेकर
ऊष्मा जल मेघ कर के
हर तरफ बरसात देती है
धरा माँ है हमारी।
हजारों जीव बसते हैं
वनस्पतियां हजारों हैं,
सभी को पालने के
पोसने के पथ हजारों हैं।
कहीं लघु कीट कीचड़ में
कहीं महलों में मानव है,
कहीं जलचर कहीं थलचर
कहीं उड़गन का है कलरव।
निभाती पृथ्वी दायित्व पूरे
एक माता का,
करें महसूस हम भी
पूत बनकर दर्द माता का।
है इसका आवरण पर्यावरण
उसको बचाना है,
हमें संतान के दायित्व को
अच्छा निभाना है।
न हो दोहन निरंकुश
पृथ्वी माता के अंगों का,
सरंक्षण करें सब लोग
मिलकर पेड़ पौधों का।
पर्वतों का खदानों का
नियंत्रित ही करें उपयोग,
समुंदर और नदियों का
नियंत्रित ही करें उपभोग।
पेड़ पौधे लगायें
जंगलों को बचाएं हम
अपनी पृथ्वी माँ को
सजायें हम।
पृथ्वी दिवस है
आज यह संकल्प लेना है
धरा है मां हमारी
इस धरा को पूज लेना है।
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कविता पर प्रकाश – कविता भाव, विचार, नाद व प्रस्तुति योजना का समन्वय है। इस समन्वय को कविता में स्थापित करने का प्रयास किया गया है। नाद स्वरूप गति, प्रवाह व तुक का समावेश किया गया है। पाठक हृदय तक सहजता से प्रविष्ट करने हेतु आम जीवन मे प्रचलित भाषा का प्रयोग किया गया है।
पृथ्वी के साथ माता व संतान का पवित्र संबंध स्थापित कर काव्य सृष्टि का लघु प्रयास है। प्रस्तुत और अप्रस्तुत के साथ अनुभूति को उकेरने का एक प्रयास सादर प्रस्तुत है।
धरा माँ है हमारी
Comments
11 responses to “धरा माँ है हमारी”
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बहुत ही सुंदर🙏🙏🙏👌
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कहीं उड़गन का है कलरव।
निभाती पृथ्वी दायित्व पूरे
एक माता का,
करें महसूस हम भी
पूत बनकर दर्द माता का।
___________ पृथ्वी को हम माँ के रूप में ही मानते हैं, पृथ्वी का माता के रूप में मानवीकरण किया है कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में । पृथ्वी दिवस पर एक श्रेष्ठ रचना की सृष्टि हुई है कवि की लेखनी से। पृथ्वी और मानव के मध्य माता और पुत्र का पवित्र संबंध स्थापित किया गया है, भाषा और शिल्प का अत्यंत सुन्दर समन्वय स्थापित करते हुए उच्च स्तरीय लेखन -
बहुत ही सुन्दर रचना और सार्थक सन्देश।
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पृथ्वी दिवस पर बहुत सुन्दर और उच्च स्तरीय कविता
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Bhut sunder mamaji
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बहुत सुन्दर रचना
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अति सुंदर रचना।।❤️👌
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बहुत शानदार रचना है। बहुत खूब
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कला व भाव दोनों दृष्टियों से बहुत उत्तम रचना।
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पृथ्वी दिवस पर आपने बहुत बेहतरीन रचना की है, वाह
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बहुत कमाल की रचना
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