धीरे-धीरे…

तुम नहीं हो तो कुछ भी
अच्छा नहीं लगता
तन्हाई से निकलने का
रस्ता नहीं मिलता
गुजरा जाता है यूं तो
दिन धीरे-धीरे
पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना
अच्छा नहीं लगता…

Comments

6 responses to “धीरे-धीरे…”

  1. बहुत सुंदर रचना

  2. अतिसुन्दर अभिव्यक्ति

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