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  1. जाने की सोचना ही करता जब दिवाली आने को हो
    अंधेरे की उम्र अब खत्म
    उजाला चहुंओर जाने को हो
    राहें कहां कभी भी बंद होती है
    कुछ कदम हिम्मत करें तो
    सौ नयी राह खुलती है

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