नए युग की सीता

तू खुद सक्षम बन ,
ए ! नारी शक्ति!
जमाना खुद बदल जाएगा,
बैठा है हर ज़हन में रावण,
राम कब तक तुझे बचाएगा,
तू सीता बन नए युग की,
रावण खुद मर जाएगा,
ना होगी फिर से अग्नि परीक्षा,
ना आंचल पर दाग लग पाएगा,
जरा निकल तो बाहर,
हीनभाव से
जमाना शीश झुकाएगा।

Comments

20 responses to “नए युग की सीता”

  1. Priyanka Kohli

    Wow kya likha h!!👏👏👏👏

  2. Praduman Amit

    💯 प्रतिशत सही कहा आपने।

  3. Anil Pandey

    ❤️ 👌

  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति
    सच में आज इसी सीता की आवश्यकता है

    1. बहुत बहुत आभार सुमन जी

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    काबिले तारीफ रचना
    आज सच में नारी को जागरूक हो जाना चाहिए उन्हें अपने आप को हीन भावनाओं से मुक्ति पाकर हर क्षेत्र में सक्षम बनना चाहिए
    बहुत ही सुंदर विचार

    1. मेरी कविताओं की निष्पक्ष भाव से समीक्षा करने के लिए बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद सर

  6. Deep Patel

    अतिसुंदर

  7. Priyanka Kohli

    Nice

  8. Aditya Kumar

    अद्भुत। वीर रस का प्रयोग आपको शोभा देता है।

    1. हार्दिक धन्यवाद

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