नजर

नजर से नजर मिली दिल की बात कह गयी,
दर्द प्यार तड़प और आह की बात कह गयी।
छुप छुपकर देखना अच्छा लगा मोहब्बत को,
तन्हाई जुदाई की बात पल पल की रात कह गयी।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

5 responses to “नजर”

  1. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

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