नन्हा सा परिन्दा

नन्हा सा परिन्दा

एक नन्हा सा परिन्दा
खोज रहा हैं आसमान…
अपने हौसले से उड़ान भर
देखना चाहता हैं आसमान…
छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं
प्रकृति की खूबसूरती को
महसूस करना चाहता हैं अपने पंखो से
आसमान की ऊँचाई को
एक छोटा सा नन्हा परिन्दा
अपने हौसले से बनाना चाहता हैं घोसला
बगिया की मनमोहक लताएँ
सर सर करती बगिया की हवाएँ
झुम झुम कर गाना चाहता हैं
वंसती का स्वागत करके
एक नन्हा सा परिन्दा
खेलना चाहता हैं प्रकृति के गोद में

महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864

Comments

3 responses to “नन्हा सा परिन्दा”

  1. Antima Goyal Avatar

    तारीफ़ से परे है आपकी कविता

    1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद अंतिमा जी

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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