नन्हें सुमन हैं

“बाल श्रम निषेध दिवस”
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नन्हे सुमन हैं इनसे
क्यों करवाते हो मजदूरी
पढ़ने दो स्कूल में इनको
ना करवाओ अब मजदूरी
खिलेगे नन्हे पुष्प तो
भारत का नक्शा बदलेगा
इनके आगे बढ़ जाने से
इनका भविष्य संभलेगा
ये कोमल टेसू हैं
मुरझा जायेगे झट से
फिर कैसे होगे परिपक्व
सुमन ये हँसते हँसते??

Comments

4 responses to “नन्हें सुमन हैं”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही उच्चस्तरीय बात कही है आप अपनी छोटी सी कविता में।आपकी कविता तारीफ़ ए क़ाबिल है।

    1. धन्यवाद 

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