नव प्रभात सजा है

नव प्रभात सजा है
नई किरण आशा की लेकर
यह प्रभात सजा है।
फूल खिले हैं गमलों में
आतुर हैं मिलने किरणों से
चिड़ियाओं के नैन लग रहे
छोटे से हिरनों से।

Comments

5 responses to “नव प्रभात सजा है”

  1. अति सुन्दर रचना

  2. Geeta kumari

    नव प्रभात सजा है
    नई किरण आशा की लेकर
    ________ नया प्रभात अवश्य ही नई आशा की किरण लेकर आता है, बहुत सुंदर भाव और शिल्प के साथ कवि चंद्रा जी की बहुत ही सुंदर और सरस रचना

  3. Satish Pandey

    कवि चंद्रा जी की यह कविता यथार्थ और कल्पना के सुंदर समावेश उपजी कविता है। कवि ने कविता के स्वर को जीवन के सार्थक भाव विचारों से सँवारा है। बहुत सुंदर पंक्तियाँ

  4. vikash kumar

    Jay ho

Leave a Reply

New Report

Close