नसीब अपना अपना…

नसीब सबका है अपना – अपना ,
कहीं ख्वाब परवान चढ़े, कहीं हुआ झूठा कोई सपना।
ज़िन्दगी में जो मिला, वो भी कुछ काम ना था।
ऐसा भी नहीं है, कि कोई ग़म ना था।
कुछ दर्द ऐसे भी है, जो बिन कहे ही सह गए,
कुछ ख्वाब ऐसे भी हैं, जो आंसुओं संग बह गए।

Comments

15 responses to “नसीब अपना अपना…”

  1. Satish Pandey

    वाह वाह, क्या बात है, बहुत सुन्दर, लेखनी की अदभुत क्षमता को सलाम

  2. Geeta kumari

    बहुत सारा धन्यवाद आपका सतीश जी। इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपकी आभारी हूं।🙏 आप खुद इतने अच्छे कवि हैं।

  3. Geeta kumari

    कृपया , दूसरी पंक्ति में काम के स्थान पर “कम” पढ़ें।

  4. आपकी लेखनी गजब की ताकत है, वाह

  5. Geeta kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद जी🙏 सादर आभार

  6. Praduman Amit

    बात में बहुत दम है। इसलिए तो रचना लाजवाब है।।

  7. Geeta kumari

    बहुत बहुत आभार सर, 🙏बहुत धन्यवाद।

  8. बहुत ही दमदार पंक्तियाँ हैं, जय हो

    1. Geeta kumari

      🙏🙏

  9. सुन्दर रचना

    1. बहुत शुक्रिया सुमन जी🙏

    1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  10. Piyush Joshi

    बहुत ही सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका पीयूष जी 🙏

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