तुम हरकतों से कहाँ बाज आओगे
जब जी चाहेंगा
मुझको सताओगे..
सारी मजबूरियां समझते हो मेरी
फिर भी मेरी नाकामयाबी का
फायदा उठाओगे..
नाकामयाबी
Comments
4 responses to “नाकामयाबी”
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क्या बात है, लाजवाब..
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Thanks
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लाजवाब कविता
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धन्यवाद
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