नाकामयाबी

तुम हरकतों से कहाँ बाज आओगे
जब जी चाहेंगा
मुझको सताओगे..
सारी मजबूरियां समझते हो मेरी
फिर भी मेरी नाकामयाबी का
फायदा उठाओगे..

Comments

4 responses to “नाकामयाबी”

  1. Geeta kumari

    क्या बात है, लाजवाब..

  2. लाजवाब कविता

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