नाग-सा अभिमान शायरी

मुझे निगलने चला था ,
नाग-सा अभिमान मेरा,
मगर मोर से संस्कार;
मेरी मां के ,
मुझे बचा लेते हैं।

Comments

8 responses to “नाग-सा अभिमान शायरी”

  1. Satish Pandey

    वाह वाह क्या बात है, लाजबाब

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