“नाम”

नाम….
यही तो है हमारी पहचान,
हमारे व्यक्तित्व की शान।
नाम केवल एक नाम ही नहीं है,
एक विशेष शख्सियत है…
जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से,
उसके आचरण से
और उसके व्यवहार से।
तो दोस्तों…
कभी अपना “नाम” खराब न करना।
क्योंकि एक बार
यदि ख़राब हो जाए नाम,
तो बरसों बीत जाएंगे उसे ठीक करने में।
ज़िन्दगी की दोपहर से,
हो सकती है ज़िन्दगी की शाम भी।
तो आओ प्रण करते हैं कि,
नहीं करेंगे कभी ऐसा काम
जिससे ख़राब हो जाए “नाम”
क्योंकि बरसों बीत जाते हैं “नाम” कमाने में॥
_____✍गीता

Comments

7 responses to ““नाम””

  1. बहुत सुंदर रचना

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद ऋषि जी

  2. वाह, नाम पर कवि गीता जी की काबिलेतारीफ रचना

    1. Geeta kumari

      सुंदर समीक्षा और कविता की सुंदर सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  3. बिल्कुल सच कहा
    नाम का ही तो सब काम है

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

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