नारी शक्ति

नारी है अबला
नारी है शक्ति ।
नारी है ममता
नारी है पूजा ।
नारी का एक रूप है बेटी
जो तपती दोपहर में ठंडी हवा है
रेगिस्तान में आशा का पानी ।
नारी सदा से ही से पिघली झुकी है।
सदा से यही भावना ले पली है ।
झुकना है सहना है करना है काम ,
बहते हो आंसू पर खुले ना जुबान।
दिल में घुटन हो ना चेहरे पर आए ।
दिल रो रहा हो फिर भी चेहरा मुस्कुराए!!
ऐसा क्या भगवान मिट्टी में डाला!!
ऐसा अनोखा भेद कर डाला ,
जहां हर अधिकार बराबरी का है
उस पर भी है पुरुषों का ही अधिकार।
अधिकार शब्द का मतलब पुरुष है
नारी का मतलब है सहना ना कहना।
कई बार मन ने खुद में ही झांका ,
कई बार खुद को गहरा कुरेदा।
क्या नारी का मतलब सिर्फ एक कठपुतली ??
बरछी यो से तीखे तानी के बीच
तूफानों के झोटों के बीच
सूख मुरझाई जड़े डगमगाई
मगर फिर भी ना जाने क्यों
फिर से खुद को बार-बार रोपा,
अपने आंसुओं से खुद को सीचा।
एक आशा का दीपक जलाया ,।फिर से हिलाकर उमंग को जगाया
फिर सोचा वो सुबह कभी तो आएगी
फिर चल पड़ी अपने जगमगाते इरादे मजबूत करके
आंसू पहुंचकर शक्ति बनके ।

निमिषा सिंघल

Comments

8 responses to “नारी शक्ति”

  1. DV Avatar

    नारी शक्ति को समर्पित बेहद प्रभावशाली रचना …नारी है शक्ति, नारी है ममता, नारी है पूजा … बहुत सुंदर वर्णन

Leave a Reply

New Report

Close