बीत गईं लाखों शामें
पर ना भूली वो रात अभी तक |
तुमने छोंड़ दिया था जिस पथ पर
मैं बैठी हूँ उस राह अभी तक |
तुम हो धड़कन तुम ही हो दिल
मेरा तो जो भी हो तुम ही हो
यह छोटी-सी बात तुम्हें मैं
समझाने में रही नाकाम अभी तक |
तुमने जो भेजी थी पायल
पहनी नहीं पर अब भी रख्खी है
तुझ तक ना पहुंचा पाई मैं
दिल का ये पैगाम अभी तक |
तुम मुझको पागल कहते थे
प्यार में जब डूबे रहते थे
तुमने कहना छोंड़ दिया पर
लेते हैं सब वो नाम अभी तक |
ना भूली वो रात…!!
Comments
7 responses to “ना भूली वो रात…!!”
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बहुत बहुत सुन्दर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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भाव पूर्ण सुंदर रचना
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धन्यवाद
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अतिसुंदर
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Tq
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Osaka video bhai uplabdh h
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