निराशाओं का भंवर

हौसला रखकर चलना होगा
परिस्थिति हमेशा इसतरह
कहाँ रह पाएगी ।
कबतक दर्द से नाता रहेगा
कहाँ तक निराशाओं का
यह भंवर सहमाएगी।
कठिनाई के ये दिन
जाते-जाते भी
सकारात्मकता की
सीख हमें दे जाएँगी ।
ये तकलीफ़े
जो वक्त से मिले हैं हमें
एक नयी सोंच से
परिचय मेरा करवायेगी ।
धीरज के ये तिनके
समेट कर रखें हैं हमने
आने वाले अच्छे दिनों की
जो नन्ही- सी आश जगायेगी ।

Comments

6 responses to “निराशाओं का भंवर”

  1. बढ़िया प्रस्तुति की है आपने
    सुमन जी हमेशा की तरह

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञाजी!

      1. उच्चस्तरीय लेखन चुंनिंदा शब्द

  2. Sandeep Kala

    बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  3. Geeta kumari

    सुन्दर अभिव्यक्ति

Leave a Reply

New Report

Close