निर्भया

रात भी खुद के तम से डरी होगी
चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी
तारों ने ना टूटने की कसम खाई होगी
जब बेबसी में उस क्षण की साक्षी होगी।

Comments

8 responses to “निर्भया”

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

  1. यथार्थ परक अभिव्यक्ति

  2. Anu Singla

    धन्यवाद

  3. चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी
    बहुत ही मार्मिक और दमदार चित्रण

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

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