रात भी खुद के तम से डरी होगी
चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी
तारों ने ना टूटने की कसम खाई होगी
जब बेबसी में उस क्षण की साक्षी होगी।
निर्भया
Comments
8 responses to “निर्भया”
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अतिसुंदर
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शुक्रिया
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यथार्थ परक अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी
बहुत ही मार्मिक और दमदार चित्रण-

धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद
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