आज गलियां कुछ सूनी सी है ,
पथिक कम जाते हैं.
गलियों के नुक्कड़ पर
बैठा मैं कुछ सोचता हूँ .
पर क्या क्या जीवन भी पथिक है ,
कभी रुकता कभी चलता है
लेकिन आज उदासी क्यों है ,
लोग डरे सहमे से हैं ,
कारन जान नहीं पाता हूँ ,
कुछ लोगो के नजदीक जाता हूँ,
जो चर्चा कर रहें है किसी बारे में ,
पूछता हुँ चलकर क्या है ,
जाता हूँ तो चुप हो जाते है सब …
…atr
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