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  1. पर नयनों ने नीर बहाया था।
    अश्रु लुढ़क पड़े थे गालों पर,
    अश्रु से ही मुख धोई थी,
    उस रात मैं बहुत रोई थी।।
    बहुत खूब, अति उत्तम कविता।

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