नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र ,

एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र,

जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र,

फिर तुम्हारी नज़र और हमारी नज़र,

बन गयी एक नज़र, हो गयी एक नज़र.

ये तुम्हारी नज़र या हमारी नज़र,

ये हमारी नज़र या तुम्हरी नज़र .

बस तुम्हारी नज़र , बस हमारी नज़र,

न तुम्हारी नज़र न हमारी नज़र ,

मैं तुम्हारी नज़र , तुम हमारी नज़र ,

देखता हु जिधर तू ही आये नज़र ,

है ये कैसी नज़र ,है ये जैसी नज़र,

या है मेरी नज़र या तुम्हारी नज़र ,

ये तुम्हारी नज़र में हमारी नज़र ,

ये हमारी नज़र में तुम्हारी नज़र ,

जो है मेरी नज़र , वो है तेरी नज़र ,

जो है तेरी नज़र ,वो है मेरी नज़र,

देख तुम एक नज़र , देखूं मैं एक नज़र,

प्रेम होता दिलों से है फंसती नज़र..

 

नज़रों का खेल अनोखा है,

फिर भी इसमें धोखा है..

फिर तुम्हारी नज़र न हमारी नज़र …

 

…atr

Comments

9 responses to “नज़र ..”

  1. Panna Avatar

    ek najar jo padi, in alfaazo ke nazaro pe
    savar gayi najar meri, dhal gayi alfaazo me.. nice!

    1. Abhishek Tripathi Avatar
      Abhishek Tripathi

      haha …. thanks .. 😀

  2. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    so nice and beautiful

    1. Abhishek Tripathi Avatar
      Abhishek Tripathi

      dhanyavad .. dost.

  3. Anjali Gupta Avatar

    love to read your poems..

    1. Abhishek Tripathi Avatar
      Abhishek Tripathi

      its plzr fr my poems to be loved … 🙂

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. Satish Pandey

    वाह वाह

  6. Satish Pandey

    बहुत खूब

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