न बोलिये बात ऐसी कि
डर जायें हम,
आपको देखकर चूक
कर जायें हम।
देखिए लाल आंखों से
यूँ मत हमें,
जिससे कि सचमुच
सिहर जायें हम।
न बोलिये बात ऐसी
Comments
5 responses to “न बोलिये बात ऐसी”
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माह दिसम्बर के सर्वश्रेष्ठ कवि बनने की बहुत बहुत बधाई।
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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बहुत सुंदर हास्य कविता, कवि ने झूठ मूट का डर दिखाकर हंसाने की कोशिश की है जो सफल हुई है , काबिले तारीफ रचना
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बहुत ही शानदार कविता
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बहुत खूब
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