पटरी पर फिर लौटा जीवन,
पर पहले जैसी बात नहीं है।
मुंह ढ़ककर घूमे हैं दिनभर,
पहले जैसी रात नहीं है।
हॉल, मॉल सब बंद पड़े हैं,
विद्यालयों पर लगे हैं ताले।
रौनक गुम है बाज़ारों से,
सूने पड़े हैं गलिहारे।
त्राहि – त्राहि हो रही धरा पर,
कोई ” संकटमोचन”, संजीवनी लाके बचाले।।
पटरी पर फिर लौटा जीवन
Comments
14 responses to “पटरी पर फिर लौटा जीवन”
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वाह वाह, कितने सुन्दर भाव हैं, बहुत खूब
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हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया🙏
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True di
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Thanks and welcome pragya ji
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वेलकम
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😊💐
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अतिसुंदर भाव
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
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sam saamyik rachnaa
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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Waah geeta ji
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Thank you very much Kamla ji
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बहुत खूब
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Thank you very much Piyush ji 🙏
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