शांत बह रही सरिता में
पत्थर न मारिये,
कर सको तो आप भी
स्नान कीजिये,
अन्यथा किनारे की
शीतल पवन का आनन्द लीजिए।
पत्थर न मारिये
Comments
8 responses to “पत्थर न मारिये”
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बहुत खूब, बहुत उम्दा
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बहुत बहुत धन्यवाद
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सादर धन्यवाद जी
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किसी ने शायरी कहां है,,
मत मार पानी में पत्थर
इसे भी कोई पीता है,
मत छोड़ किसी का दिल,
देख तुझे कोई जीता है✍👌👌👌👌👌-
बहुत बहुत धन्यवाद
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वाह वाह सर अति उम्दा
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अतिसुंदर
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