पनघट

पनघट से पानी लाती
नारी की तस्वीर सजाली कमरे में,
उस रईस ने ये कभी ना सोचा,
ये कौन से गांव की है ।

*****✍️गीता

Comments

5 responses to “पनघट”

    1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  1. बहुत खूब, कवि गीता जी की बेहतरीन अभिव्यक्ति

    1. इस प्रेरक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी.

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