पन्ना:- “मोहब्बत की तालीम”

हर पन्ने पर तुम मोहब्बत को लिखते हो
किसी की मोहब्बत में खोए से
लगते हो
आज पढ़ी तुम्हारे दिल की डायरी उलटकर
मोहब्बत की तालीम लिये से
लगते हो
यूं तो हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं फिर भी,
मेरी तरह मोहब्बत में तुम बर्बाद लगते हो….

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3 responses to “पन्ना:- “मोहब्बत की तालीम””

  1. अतिसुंदर रचना 

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