पपीहे की आस(कहानी)

पपीहे की आस

जैसी खुशी बच्चे के पैदा होने पर होती हैं ,शायद उससे भी ज्यादा खुशी किसान  को बारिश होने पर होती हैं
यही खुशी प्यारेलाल की आंखों में दिख रही है, आज बसंत के मौसम में इंद्र की कृपया से खेतों में मानो जान सी आ गई थी।
वर्षा के साथ-साथ प्यारेलाल के मन में कल्पनाओं ने जन्म लेना शुरू कर दिया था, अबकी बार फसल अच्छी होगी तो वह सारा कर्जा उतार देगा, फिर मुनिया को ,गंठा रोटी खाने के लिए मजबूर भी नहीं होना पड़ेगा‌।

दो एकड़ जमीन को बंजर से उपजाऊ बनाने में प्यारेलाल और धनवती ने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी, मगर इस साल बारिश समय पर हुई है इसलिए वह बहुत उत्साहित हैं।
रिमझिम बारिश में प्यारेलाल को खेत में हल जोतना बहुत ही रास आ रहा था ,वह बैलों के पीछे ऐसे सवार था जैसे कोई राजा अपने राज महल में रथ की सवारी कर रहा हो।

जैसे-जैसे बारिश तेज तेज होती प्यारेलाल के मुख से संगीतमय गीत की ध्वनि वातावरण में चारों तरफ फैल जाती।

“ए जी! सुनते हो! आ जाओ खाना खा लो फिर करते रहना जुताई ।”
धनवती की आवाज सुनकर प्यारेलाल अपने गीत को विराम देता है। “आ गई !भाग्यवान!बस रूको हो गया है काम,आता हूं।”
“जब तक आप और मुनिया खाना खा लो, तब तक, मैं पौध लगाना शुरु करती हूं। ”
“मुनिया की मां !ज्यादा मेहनती मत बनो पहले खाना खा लो फिर लगते हैं तीनों!”प्यारेलाल प्यार से कहते हैं।
“मैं खा लूंगी फिर”धनवती ने उठते हुए कहा।
प्यारेलाल हाथ पकड़ते हुए “बैठ जाओ और जल्दी से खा लो, जब तक बारिश भी हल्की हो जाएगी।”

अगले दो  दिन तक बारिश अच्छी होती है प्यारेलाल अपने दोनों खेतों में धान की फसल लगा देता है, फिर पहले की तरह खेत से घर, घर से खेत, यही तो चलता है किसान के जीवनी में।
मगर अब सूर्य देवता का क्रोध दिन -प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था और इंद्र देवता मानो बादलों को लाना ही भूल गए हो। जो खेत पानी की वजह से लहरा रहे थे, अब वह  धरती की तपन की वजह से मुरझा रहे थे और धरती शुष्क हो गई थी।
उधर प्यारेलाल की उम्मीद की सीमा तेज धूप में गोते खा रही थी।

“हे ईश्वर !बस एक बार अपनी कृपया कर दे; हम पर ।
बस एक बार बरस जाओ, नहीं तो मुनिया के बापू सच में टूट जाएंगे।”धनवती मंदिर में भगवान के सामने हाथ जोड़े खड़ी है ,और मानो आंखों से बह रहा झरना, बहुत कुछ कह रहा है।
किंतु जिस चीज की आवश्यकता हमें होती है वह जल्दी से मिलती कब हैं!

उधर प्यारेलाल खेत में आसमान की तरफ आस लगाए बैठा है और उसी पेड़ के ऊपर पपीहा लगातार बोले जा रहा है ,उस पपीहे की दशा प्यारेलाल ही समझ सकता था।

उस पपीहे में और प्यारेलाल में अब कुछ अंतर नहीं था दोनों ही बारिश के लिए तरस रहे थे।
बारिश को हुए महीना हो गया खेतो में फसल दिन प्रतिदिन सूखती जा रही थी मगर बारिश के दूर-दूर तक कोई निशान दिखाई नहीं दे रहे थे।
अब प्यारे लाल के सपनें और कल्पनाएं मानो धूप के नीचे दबती जा रही थी।
पेड़ के नीचे बारिश की राह देखकर उदास सा मुंह लेकर वह घर लौट आता था।
उधर पेड़ पर बैठा पपीहा उसकी क्षमता को कुछ हौसला तो देता ही था, मगर प्यास के कारण उसकी भी अवस्था बहुत बुरी हो गई थी।

अगले दिन प्यारेलाल से उस पपीहे की आवाज सुनी नहीं जा रही थी ,उसकी आवाज में एक तरह से रुदन व  करहाहट थी ।
मानो वह कह रहा हो कि अगर आज बारिश नहीं हुई तो सच में वह अपने प्राण त्याग देगा ।
यही स्थिति प्यारेलाल की थी, क्योंकि अबकी बार फसल नहीं हुई तो साहूकार उसे सच में मार देंगे।

अचानक पीहू- पीहू-पीहू की आवाज शांत हो गई और पपीहा एकदम से नीचे गिर जाता है ,और प्यारेलाल के शरीर में भी मानो जान बाकी ना रही हो ।
इतना कुछ होने के बाद में अचानक से बहुत तेज बादल गरजते हैं ।और देखते ही देखते प्यारेलाल के शौक में बादल भी रोने लग जाते है । मानो वे कह रहे हो, ईश्वर के दर पर देर है अंधेर नहीं! 
                           समाप्त ।
                                —–मोहन सिंह मानुष

Comments

12 responses to “पपीहे की आस(कहानी)”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    Thank you

  2. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    आप कहानी भी लिखते हैं, बहुत सुंदर

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    हां जी !कर लेते हैं थोड़ी बहुत कोशिश
    बहुत-बहुत आभार 🙏

  4. Rishi Kumar

    आप शब्दों के जादूगर है
    पपीहे को पानी की प्यास होती है
    हमें आपकी कविता पढ़ने की प्यास होती है
    _________________________________

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      ऋषि जी यह तो आपने बहुत बड़ी बात कह दी, पता नहीं कैसे हजम होगी मुझे😊🙏🙏
      अभी तो मुझको बहुत कुछ सीखना है
      खैर! बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 आपका मुझको व मेरी कविताओं को इतना सम्मान देने के लिए

  5. Geeta kumari

    बहुत सुंदर……आपने अपनी कहानी के माध्यम से अंत तक बांधे रखा।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद ,मैडम जी
      कहानी को समय देने के लिए हम आपके ऋणी है

  6. बहुत ही सुंदर कहानी वाह

  7. Pratima chaudhary

    एक किसान के जीवन की बहुत ही मार्मिक कहानी

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