*परिवर्तन”

परिवर्तन तो तय है
उससे क्या भय है
प्रतीक्षा कर,
किसी का दिल बदलेगा अगर,
तो किसी के दिन भी बदलेंगे

*****✍️गीता

Comments

10 responses to “*परिवर्तन””

  1. मेरी निम्न पंक्तियों को पूर्ण करती हुई आपकी रचना

      1. समवेत स्वर में जय हिंद

    1. और वह इस प्रकार कि
      मैंने समवेत स्वर में जय हिंद बोलने और देश से प्रेम करने की बात कही और आपने दिल और दिन बदलने की क्योंकि जब किसी का हृदय परिवर्तन होगा तभी वह इस देश को अपना समझेगा

      1. कुछ भी

      2. Pragya Shukla

        Kuch bhi ka kya matalab h???
        Maine kya galat bola balki aapki kavita ka samman badhaha h…

  2. लाजवाब 👌👌👌

    1. Geeta kumari

      आभार ऋषी जी

    1. सादर धन्यवाद भाई जी

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