*पर फ़ैला ले भारती*

शस्त्र उठा लो अब सीते,
श्री राम नहीं आएंगे
करनी होगी खुद अपनी रक्षा,
श्री रघुनाथ नहीं आएंगे
शस्त्र उठा लो हे द्रौपदी,
श्री श्याम नहीं आएंगे
सभा में अपने भी,अपने ना रहे
बिगुल बजा, कर शंख-नाद,
श्री श्याम नहीं आएंगे
झांसी की रानी सम बन जा,
तीर, तलवार उठा ले अपने
लड़ना होगा तुझे अकेले,
मोती भाई, रघुनाथ सिंह दीवान नहीं आएंगे
पर फ़ैला ले भारती,
उड़ जा ऊंची उड़ान
बन जा क्षितिजा तू,
ये कलियुग है, मेरी जान
तुझे संभालने अब कोई,
भगवान नहीं आएंगे…

*****✍️गीता
*भारती का अर्थ है — भारतीय नारी

Comments

4 responses to “*पर फ़ैला ले भारती*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब विचारणीय तथ्य

    1. सादर धन्यवाद एवम् आभार भाई जी 🙏

  2. Seema Chaudhary

    बहुत सुंदर कविता है गीता , आजकल के माहौल में लड़कियों को अपनी सुरक्षा अपने आप ही करनी होगी , कोई नहीं आएगा मुसीबत में बचाने ।रामायण और महाभारत का बहुत ही अद्भुत उदाहरण दिया है बेहद शानदार प्रस्तुति ।

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