पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले

ज़िन्दगी को कर के ज़ुदा ज़िन्दगी से

ज़िन्दगी को मिला दिया ज़िन्दगी में

कोई ऐसी मौत का शिकवा क्यों करे

पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले

…… यूई

Comments

3 responses to “पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    वाह वाह

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