नाम बदलते रहा मैं
चेहरे छुपाता रहा
अपनी झूठी पहचान बनाने को
पैंतरे बदलता रहा,
पहचान
Comments
4 responses to “पहचान”
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खूब
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बहुत खूब
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श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु पहचान बदलते रहने का भाव उजागर हुआ है
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कवि ने अपनी व्यथा को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है
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