पहचान

नाम बदलते रहा मैं
चेहरे छुपाता रहा
अपनी झूठी पहचान बनाने को
पैंतरे बदलता रहा,

Comments

4 responses to “पहचान”

  1. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    बहुत खूब

  2. Satish Pandey

    श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु पहचान बदलते रहने का भाव उजागर हुआ है

  3. कवि ने अपनी व्यथा को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है

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