माँ तुम
जीवन में सब कुछ हो,
प्राण हो, सांस हो,
भूमि पर मेरी पकड़ हो,
हृदय की धड़कन हो,
उत्साह का मूल हो,
संसार बदल गया
लेकिन माँ तुम वही
वैसी ही
ममतामयी फूल हो।
गुरु तुम
ईश्वर तुम,
करुणा तुम, अन्नपूर्णा तुम।
बलिदान का प्रतीक तुम
सम्मान का प्रतीक तुम।
तोतली जुबान का
पहला शब्द हो तुम,
जीवन का सर्वोच्च
शब्द हो तुम।
तुम हो, तब हम हैं माँ
जीवन का मूल हो तुम।
पहला शब्द हो तुम
Comments
6 responses to “पहला शब्द हो तुम”
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बहुत सुन्दर
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धन्यवाद
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माँ के निस्वार्थ प्रेम पर लिखित कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर कविता… उच्च स्तरीय लेखन
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आपके द्वारा की गई इस सुन्दर समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर।
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सादर धन्यवाद
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