पाषाण युग

पाषाण युग

दिखावे की संस्कृति ,
दिखावे का प्यार।
प्रचार पाने को ,
हर कोई तैयार।
कैसा यह संसार !
बदलता बातें पल पल
सच बन जाता झुठ
यहां हर कदम कदम पर
पत्थर से इंसान यहां,
हर घड़ी बनावट।

दुख में हों सब तल्लीन जहां
वहांनौटंकी की आहट ।

निमिषा सिंघल

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