10 Comments

    1. सादर आभार सर
      मेरे आसपास जो घटित हो रहा है
      उसी को उभारने का प्रयास है ।समय बदलेगा, शहरों की तरह ग्रामीणभारत की बेटियां भी उङान भरेगी । यह तय है इनकी उम्मीदों को भी परवाज अवश्य मिलेंगे ।

  1. लगता पूछती हो, बता माँ
    कबतक बंदिशो में रहना होगा
    कब खुलकर हंसना, बोलना
    बेखौफ़ घर से निकलना होगा ।
    बहुत सुंदर पंक्तियां
    प्राचीन समय से महिलाओं पर लग रही बंदिशों तथा असुरक्षितता के भावों के प्रति रोष प्रकट करती हुई बहुत सुंदर काव्य कृति

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